
सरायकेला/पूर्वी सिंहभूम: कोल्हान क्षेत्र के पूर्वी सिंहभूम जिले के जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के बड़ाम प्रखंड में स्थित आदिवासी गांव खोकरो में विकास की कमी साफ तौर पर दिखाई देती है। घने जंगल और दलमा वन्यजीव अभयारण्य के बीच बसे इस गांव के ग्रामीण मुख्यतः कृषि और वन संसाधनों पर निर्भर हैं, लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ अभी तक जमीन पर नहीं पहुंचा है।

प्रमुख समस्याएँ एवं चुनौतियाँ

समस्या का क्षेत्र वर्तमान स्थिति प्रभाव/चुनौती
पेयजल शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण मुख्य रूप से झरने के पानी पर निर्भर हैं। स्वास्थ्य जोखिम।
स्वास्थ्य निकटतम स्वास्थ्य केंद्र 20-30 किमी दूर है। सांप-बिच्छू के काटने या अन्य आपात स्थितियों में समय पर इलाज न मिलना।
सड़क सड़कें बरसात में बहुत खराब हो जाती हैं। बिजली 2010 के आसपास पहुंची थी। आवागमन कठिन, विकास की गति धीमी।
आवास अधिकांश घर कच्ची मिट्टी और तिरपाल की छत वाले हैं। “मैया सम्मान योजना” का लाभ नहीं मिला है। जीवन यापन की खराब गुणवत्ता।
रोजगार नौकरी/स्वरोजगार के अवसरों की कमी के कारण ग्रेजुएट युवा भी बाहर जाने को मजबूर हैं। मानव संसाधन का पलायन।
सुरक्षा जंगली जानवर (हाथी, भालू, तेंदुआ) और पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने का भय। जान-माल की सुरक्षा का अभाव।
ग्रामीणों की चिंता और राजनीतिक उपेक्षा
ग्रामीणों ने नेताओं के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की। स्थानीय निवासी हरिपद सिंह सरदार और अनिता सिंह सरदार ने कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई भी नेता या मंत्री इस क्षेत्र की सुध लेने नहीं आता।
ग्रामीणों के अनुसार, यह क्षेत्र पहले नक्सल प्रभावित माना जाता था, जिसे दलमा आंचलिक सुरक्षा समिति ने प्रशासन के सहयोग से खदेड़ा। देश की आजादी और झारखंड राज्य बनने के 20 वर्षों से अधिक समय बाद भी इस क्षेत्र में विकास की रोशनी नहीं पहुंची है।
खोकरो गांव के टोला (पहाड़ियाटोला, हासाडीह, जोबलाकोचा, उड़ालडीह, चिंगड़ीटोला, बुचाडीह, बेल्डीह) के ग्रामीण अभी भी पूरी तरह कृषि और जंगल पर निर्भर हैं।
जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इस क्षेत्र के विकास के लिए योजनाएँ तैयार की जा रही हैं, लेकिन ग्रामीणों में तत्काल कार्यान्वयन की कमी को लेकर काफी असंतोष देखा जा रहा है। उनकी प्रमुख मांगें सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएँ और रोजगार हैं।
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