
चाईबासा। उपभोक्ता आयोग में दायर एक महत्वपूर्ण मामले में शिकायतकर्ता सी.आर.पी.एफ. के सेकंड इन कमांड सच्चिदानंद मिश्रा को बड़ी राहत देते हुए आयोग ने एसबीआई कार्ड/एसबीआई क्रेडिट कार्ड/एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज प्रा. लि. को सेवा में कमी (Deficiency in Service) एवं अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी पाया।

मामले के संक्षिप्त तथ्यों के अनुसार, शिकायतकर्ता (उक्त वर्ष में सी.आर.पी.एफ. चाईबासा के डिप्टी कमांडेंट) सच्चिदानंद मिश्रा ने वर्ष 2010 में एसबीआई क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया था, परंतु कार्ड कभी भी उसके पास वितरित नहीं हुआ। इसके बावजूद उसे बार-बार बकाया राशि जमा करने के लिए फोन कॉल्स और बिल प्राप्त होते रहे। बाद में जब शिकायतकर्ता ने अपना सिबिल (CIBIL) रिपोर्ट जांचा, तो लगभग ₹5,000/- बकाया दर्शाया गया, जिससे उसका क्रेडिट स्कोर गिरकर 558 तक पहुंच गया।

शिकायतकर्ता ने एसबीआई कार्ड से ई-मेल के माध्यम से कई बार संपर्क किया तथा बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) के समक्ष भी शिकायत की, परंतु कोई प्रभावी समाधान नहीं मिला। इसके उलट, एसबीआई कार्ड ने “कस्टमर सेंट्रिक एप्रोच” का हवाला देते हुए खाता बंद कर दिया और राशि को “राइट-ऑफ” दिखाते हुए सिबिल में नकारात्मक प्रविष्टि कर दी, जिसके कारण शिकायतकर्ता को गृह ऋण पर अधिक ब्याज देना पड़ा तथा वाहन ऋण भी खराब सिबिल स्कोर के कारण प्रभावित हुआ। साथ ही, बिना लिखित सहमति के रॉयल सुंदरम बीमा पॉलिसी सक्रिय करने का आरोप भी सामने आया। इसके पश्चात सच्चिदानंद मिश्रा ने जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ता राजाराम गुप्ता के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।
सुनवाई के दौरान ओपी संख्या 2 (एसबीआई, चाईबासा शाखा) ने स्वयं को इस विवाद से असंबंधित बताया, जबकि ओपी संख्या 1 एवं 3 अनुपस्थित रहे और मामला उनके विरुद्ध एकपक्षीय (Ex-parte) चला। आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत ई-मेल, सिबिल रिपोर्ट, स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट तथा अन्य दस्तावेजों के आधार पर पाया कि कार्ड की प्राप्ति का कोई प्रमाण नहीं है, फिर भी शुल्क और ब्याज लगाए गए तथा बाद में राइट-ऑफ कर सिबिल में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की गई।
आयोग ने माना कि एसबीआई कार्ड/एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज प्रा. लि. की ओर से स्पष्ट रूप से सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापार व्यवहार हुआ, जिससे शिकायतकर्ता की वित्तीय प्रतिष्ठा और क्रेडिट इतिहास को नुकसान पहुंचा।
आदेश
आयोग ने ओपी संख्या 1 एवं 3 को संयुक्त रूप से निर्देशित किया कि वे—
₹1,50,000/- क्षतिपूर्ति के रूप में,
₹25,000/- मानसिक पीड़ा एवं कष्ट के लिए,
₹25,000/- वाद व्यय के रूप में,
कुल राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित निर्णय की तिथि से 60 दिनों के भीतर अदा करें।
बाद में जिला प्रशासन, गुरुग्राम के माध्यम से दो डिमांड ड्राफ्ट (₹2,00,000/- एवं ₹17,793/-) आयोग को प्राप्त हुए। दिनांक 02.02.2026 को डिक्री-होल्डर उपस्थित होकर उक्त राशि पूर्ण एवं अंतिम भुगतान के रूप में प्राप्त करने की पुष्टि की तथा आगे कार्यवाही न चलाने का निवेदन किया।
आयोग ने प्रार्थना स्वीकार करते हुए आदेश के निष्पादन को पूर्ण मानकर प्रकरण का निस्तारण कर दिया। आदेश की निःशुल्क प्रति पक्षकारों को उपलब्ध कराने तथा आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए। अधिवक्ता राजाराम गुप्ता ने कहा कि उपभोक्ता आयोग का यह फैसला बैंकिंग कार्य प्रणाली एवं क्रेडिट कार्ड से जुड़े विभिन्न परेशानियों से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
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