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गोविंदपुर: ध्रुव-प्रह्लाद चरित्र और सृष्टि वर्णन से भावविभोर हुए श्रद्धालु

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Mar 11, 2026

 

 

गोविंदपुर में पूज्य श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज के सानिध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भक्ति की अविरल धारा बही। महाराज श्री ने ध्रुव जी और प्रह्लाद जी के चरित्र के माध्यम से भक्तों को जीवन के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि ध्रुव जी का जीवन हमें सिखाता है कि अपमान और कष्ट को यदि सही दिशा दे दी जाए, तो वही हमारे उत्थान का कारण बन जाते हैं। मात्र पाँच वर्ष की आयु में अडिग संकल्प लेकर उन्होंने सिद्ध किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, तो विपरीत परिस्थितियाँ भी सफलता नहीं रोक सकतीं। इसी प्रकार प्रह्लाद जी का प्रसंग हमें निर्भयता और क्षमा की शिक्षा देता है। महाराज जी ने कहा कि सच्ची भक्ति परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होती; यदि मन भगवान में स्थिर है, तो अग्नि, विष या सर्प जैसी कोई भी आसुरी शक्ति भक्त का अहित नहीं कर सकती।

 

कथा के दौरान सृष्टि की उत्पत्ति का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया गया कि यह संसार केवल भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि ईश्वर की दिव्य लीला है। भगवान की नाभि से प्रकट कमल पर ब्रह्मा जी ने तप के माध्यम से सृष्टि सृजन का ज्ञान प्राप्त किया। महाराज श्री ने जोर देकर कहा कि भगवान केवल मंदिरों तक सीमित नहीं हैं, वे सृष्टि के कण-कण और हर जीव के हृदय में विराजमान हैं। वे हमारे बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि सच्चे मन और निर्मल भाव को देखते हैं। आज के समाज में बढ़ती धर्म से दूरी और संस्कारों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि गीता और रामायण ही हमें आदर्श जीवन और सुदृढ़ राष्ट्र का मार्ग दिखाते हैं।

 

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विमल चन्द्र पद्दा दे, संजय अग्रवाल, अनिता अग्रवाल, प्रदीप बंसल, कांता बंसल, पिकु सिंह, रिंकी सिंह, जगन्नाथ दे, पुष्पा देवी, अशोक कुमार दे, ललीता देवी, अरूण चन्द्र दे, पुतुल देवी सहित समस्त गोविंदपुर वासियों का विशेष सहयोग रहा। कथा के अगले पड़ाव में 12 मार्च 2026, गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।


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