
केरेडारी/हजारीबाग: केरेडारी प्रखण्ड में सीबी और बीजीआर कंपनी के खिलाफ चल रहे जन आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए पत्रकार जिला ब्यूरो कीर्तन कुमार और पांच अन्य रैयतों को जेल से रिहा कर दिया गया है। इस रिहाई के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों और विस्थापितों में खुशी की लहर है, वहीं प्रशासन और कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

षड्यंत्र के तहत गिरफ्तारी का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि पत्रकार कीर्तन कुमार लगातार रैयतों की जमीन और विस्थापन के मुद्दों को सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों के माध्यम से मजबूती से उठा रहे थे। इसी आवाज को दबाने के लिए प्रशासन और कंपनी ने कथित तौर पर एक षड्यंत्र रचा। बताया जा रहा है कि जिस आवेदन के आधार पर केस दर्ज किया गया, उसमें कीर्तन कुमार का नाम तक अंकित नहीं था और न ही किसी रैयत के पास से कोई हथियार बरामद हुआ।
मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा
परिजनों ने आरोप लगाया कि पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक निर्मला देवी का मेडिकल केरेडारी स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया, लेकिन पत्रकार कीर्तन कुमार और उनके साथ मौजूद 7 वर्षीय बच्चे सहित अन्य लोगों का मेडिकल नहीं कराया गया। संवैधानिक तौर पर अपना हक मांगना जायज है, लेकिन प्रशासन ने परिजनों को जानकारी दिए बिना ही उन्हें हिरासत में भेज दिया था।
अंबा प्रसाद का समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम में वर्तमान विधायक अंबा प्रसाद लगातार परिजनों के संपर्क में रहीं और आंदोलनकारियों का साथ दिया। रिहाई के बाद पत्रकार कीर्तन कुमार ने कहा कि जनता की आवाज और रैयतों के हक की लड़ाई को दबाया नहीं जा सकता। वह आगे भी विस्थापितों के मुद्दों को उजागर करते रहेंगे।
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