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कटिहार: बिहार के आजमनगर में ‘ओल चिकि अध्ययन केंद्र’ स्थापित करने का निर्णय, संथाली भाषा के पठन-पाठन को मिलेगा बढ़ावा

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Nov 25, 2025
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सरायकेला/कटिहार। बिहार के कटिहार जिले के आजमनगर प्रखंड स्थित खजुरिया प्राइमरी स्कूल में आज (दिनांक अज्ञात, चूंकि यह “आज” हुई है) संथाली भाषा के पठन-पाठन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता बिहार के प्राणपूर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी मनोज कुमार मुर्मू ने की।

 

🌟 मुख्य निर्णय और उद्देश्य

बैठक में पूरे कटिहार जिले में ओल चिकि अध्ययन केंद्र स्थापित करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय छात्रों को उनकी मातृभाषा संथाली और ओल चिकि लिपि में शिक्षा प्रदान करना है, ताकि वे शैक्षिक रूप से विकसित हो सकें।

 

🗣️ मुख्य अतिथि का संबोधन

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड राज्य से आदिम डेवलपमेंट सोसायटी के सचिव बाबु राम सोरेन उपस्थित थे। उन्होंने संथाली में महत्वपूर्ण संदेश दिया:

 

“जानाम रोड़ ओल ते गेयान डाहार ब पांजाया धारती रे होड़ लेका ताहेन ब रिकाया” (अर्थात् मातृभाषा संथाली भाषा और ओल चिकि लिपि से शिक्षा ग्रहण करेंगे और हम लोग भी अन्य लोगों की तरह शिक्षित व प्रशिक्षित रहने का कार्य करेंगे।)

 

सोरेन ने संथाली भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया:

 

इसे भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में वर्ष 2004 में शामिल किया गया था।

 

नई शिक्षा नीति-2020 में भी इसे मान्यता दी गई है।

 

ओल चिकि लिपि को अब यूनिकोड में शामिल किया गया है।

 

➡️ आगे की योजना

इस निर्णय के बाद, कटिहार जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ओल चिकि अध्ययन केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इन केंद्रों पर स्थानीय छात्रों को संथाली भाषा एवं लिपि में शिक्षा प्रदान की जाएगी।

 

बैठक में मनोज कुमार मुर्मू और बाबु राम सोरेन के अलावा स्थानीय शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अध्ययन केंद्रों के स्थान चयन और संचालन की प्रक्रिया संभालने के लिए एक समिति का गठन भी किया गया है।

 

यह पहल भाषा संरक्षण और जनजातीय शैक्षिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्या आप कटिहार जिले में संथाली भाषा के महत्व या इस प्रकार के अन्य शैक्षिक प्रयासों के बारे में और जानकारी चाहते हैं?


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