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एनटीपीसी के खिलाफ विस्थापितों का ऐलान-ए-जंग, 9 फरवरी से अनिश्चितकालीन धरना

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Feb 7, 2026

 

पंकज ठाकुर

बड़कागांव। एनटीपीसी पकरी बरवाडीह कोल खनन परियोजना में सरकार और एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा किए गए पुनर्वास व रोजगार के वादे कागजों तक ही सीमित साबित हो रही है। रैयती जमीन अधिग्रहण कर लिए जाने के वर्षों बाद भी दर्जनों विस्थापित परिवार बेरोजगारी और बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

जमीनी हकीकत यह है कि सरकार और प्रबंधन दोनों ने प्रभावितों की सुध लेना तक जरूरी नहीं समझा। एनटीपीसी पकरी-बरवाडीह कोयला परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों द्वारा एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया गया है। इस संबंध में अंचल अधिकारी, बड़कागांव को लिखित सूचना देकर अवगत कराया गया है कि आगामी 9 फरवरी 2026 (सोमवार) को एनटीपीसी के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। जिसकी लिखित सूचना अनुमंडल पदाधिकारी हजारीबाग को भी दी गई है।

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि बड़कागांव प्रखंड अंतर्गत पकरी-बरवाडीह कोल परियोजना के कारण कई गांवों के लोग विस्थापन, प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी द्वारा अब तक पुनर्वास, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं को लेकर किए गए वादों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है, जिससे लोगों में भारी असंतोष है।

*बिना मुआवजा दिए जमीन अधिग्रहण का आरोप*, *एनटीपीसी पर गंभीर सवाल*

ग्राम नगड़ी निवासी मो० एनुल हक़ ने आरोप लगाया है कि खाता नंबर 91 के अंतर्गत प्लॉट नंबर 552, 553 एवं 732 की भूमि का न तो उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा दिया गया और न ही पूर्व सूचना या सहमति ली गई, इसके बावजूद उनकी जमीन पर भारी मशीनें लगाकर खनन कार्य कर दिया गया।

आगे उन्होंने कहा कि इसी प्रक्रिया में उनके आवासीय घरों को भी ढहा दिया गया, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं। पीड़ितों का कहना है कि वे वर्षों से उक्त भूमि पर रह रहे थे, लेकिन एनटीपीसी प्रबंधन ने कानूनन प्रक्रिया का पालन किए बिना जबरन कार्रवाई की। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि परियोजना से एनटीपीसी को हजारों करोड़ का मुनाफा हो रहा है, जबकि जिनकी जमीन छीनी गई,

उन्हें न स्थायी नौकरी दी गई, न समुचित मुआवजा और न ही पुनर्वास की मूलभूत सुविधाएं। खनन से फैल रहे प्रदूषण ने गांवों को बीमारियों का केंद्र बना दिया है, लेकिन स्वास्थ्य शिविर और इलाज की व्यवस्था सिर्फ फाइलों में दिखाई जाती है। पीड़ितों ने प्रशासन को दिए आवेदन में स्पष्ट चेतावनी दी है कि 9 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन धरना शुरू होगा। आंदोलन की हर स्थिति की जिम्मेदारी सरकार और एनटीपीसी प्रबंधन पर होगी।

विस्थापितों का कहना है कि यह केवल मांगों का सवाल नहीं, बल्कि सरकार की नीयत और जवाबदेही का इम्तिहान है। “अगर सरकार सचमुच विस्थापितों के साथ है, तो रोजगार, पुनर्वास और स्वास्थ्य की गारंटी लिखित रूप में दे,” ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एनटीपीसी प्रबंधन के साथ वार्ता कराई जाए, ताकि विस्थापितों को उनका हक मिल सके और आंदोलन की नौबत न आए।


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