
संवाददाता अंतर्कथा केरेडारी बालमुकुंद दास

एनटीपीसी केरेडारी कोल माइंस, में MDO कंपनी बीजीआर लगातार अपनी खदानों को ऊँचाई पर पहुँचा रही है। लेकिन यहाँ के विस्थापित और प्रभावित लोगों के साथ घोर अन्याय हो रहा है।

बीजीआर कंपनी विस्थापितों को मात्र ₹12,000 वेतन पर नौकरी दे रही है।
जबकि बाहर से आए लोगों को, जो मामूली काम (जैसे धोबी का काम) कर रहे हैं, ₹30,000 से भी अधिक वेतन दिया जा रहा है।
विस्थापित लोग अपनी ही जमीन पर, कड़ी धूप और कठिन मेहनत करके कंपनी के लिए पसीना बहा रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ़ शोषण और लाचारी मिल रही है।
जिन परिवारों की जमीन पहले खेती – बारी से घर चलता था उस ही जमीन को कम्पनियों ने बंजर घोषित करके कोयला का उत्पादन कर रही हैं
इसी अन्याय के खिलाफ कुछ ईमानदार मजदूर साथियों ने एक यूनियन का गठन किया है, जो मजदूरों को उनका हक दिलाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है।
इसलिए सभी साथियों से अपील है कि इस रिपोर्ट को ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें, ताकि हमारी आवाज सरकार तक पहुँचे और विस्थापित परिवारों को न्याय मिल सके।
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