
सरायकेला-खरसावाँ: ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के चारों प्रखंडों में हाथियों के बढ़ते आतंक ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। इस गंभीर समस्या को लेकर चांडिल गोलचक्कर स्थित आनंद होटल में चांडिल प्रमुख रामकृष्ण महतो की अध्यक्षता में एक पत्रकार सम्मेलन आयोजित किया गया। प्रेस वार्ता के दौरान प्रमुख ने वन एवं पर्यावरण विभाग की उदासीनता पर कड़ा प्रहार किया और चेतावनी दी कि यदि विभाग समय रहते ठोस कदम नहीं उठाता है, तो क्षेत्र की जनता उग्र आंदोलन को बाध्य होगी।
दलमा से पलायन कर गांवों में डेरा डाल रहे हाथी रामकृष्ण महतो ने बताया कि 193.22 वर्ग किमी में फैले दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में हाथियों के लिए भोजन और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण गजराज आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं। दलमा गज परियोजना से भटके ये हाथी अब ईचागढ़ विधानसभा के विभिन्न छोटे-बड़े जंगलों में डेरा डाले हुए हैं।

शाम ढलते ही शुरू होती है तबाही क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। नीमडीह थाना क्षेत्र के सीमागांव, तिल्ला, रसूनिया, जुगीलांग, पुड़िया और कुकड़ु प्रखंड के लापंगा, लेटेंदा, बाकरकुड़ी जैसे गांवों में शाम ढलते ही हाथियों का झुंड प्रवेश कर जाता है। हाथी न केवल घरों को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं, बल्कि अंदर रखे अनाज को भी अपना निवाला बना रहे हैं। इस मानव-हाथी संघर्ष में अब तक कई ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं।

वन विभाग पर जांच की मांग प्रेस वार्ता में रामकृष्ण महतो ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह व्यक्त करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि विभाग की लापरवाही के कारण ही आज बेगुनाह ग्रामीणों की जान जा रही है। उन्होंने इस विषय पर जनहित याचिका (PIL) दायर करने की भी बात कही।
इस अवसर पर नितेश तिवारी, चंदन बर्मा सहित कई स्थानीय गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे, जिन्होंने एक स्वर में वन विभाग के प्रति नाराजगी जाहिर की।
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