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इंसानियत का पाठ पढ़ा गया बेजुबान: प्यास से तड़पते तोते और उसके बच्चों के लिए ‘देवदूत’ बना बंदर।

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Apr 6, 2026
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निरसा: भीषण गर्मी के इस मौसम में जहाँ इंसान अक्सर संवेदनहीन होता जा रहा है, वहीं निरसा के एक जंगल से दिल को छू लेने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक बंदर ने अपनी सूझबूझ और सेवा भावना से एक बीमार तोते और उसके दो मासूम बच्चों की जान बचाकर यह साबित कर दिया कि परोपकार के लिए भाषा नहीं, बल्कि साफ़ दिल की जरूरत होती है।

 

क्या है पूरा मामला?

भीषण गर्मी और लू (Loo) के कारण जंगल में रहने वाला एक तोता बुरी तरह बीमार पड़ गया था। कई दिनों से बीमार होने के कारण वह अपने घोंसले में बेसुध पड़ा था। उसके दो छोटे बच्चे भी कई दिनों से भूख-प्यास के मारे निढाल होकर चुपचाप सोए हुए थे। पूरा परिवार मौत के कगार पर था।

 

बंदर बना रक्षक

उसी दौरान वहाँ से गुजर रहे एक बंदर की नजर बेसुध पड़े तोते पर पड़ी। तोते और उसके बच्चों की हालत देख बंदर ने तुरंत सक्रियता दिखाई। बंदर कहीं से एक घड़े में पानी भरकर लाया और तोते के शरीर पर डाला। पानी पड़ते ही तोते को होश आया। इसके बाद बंदर ने न केवल उन्हें पानी पिलाया, बल्कि कहीं से दाना लाकर तोते और उसके बच्चों का पेट भी भरा। बंदर की इस निस्वार्थ सेवा से तोते के परिवार की जान बच गई।

 

समाज के लिए एक बड़ी सीख

इस घटना ने समाज के उस वर्ग को आईना दिखाया है जो केवल उपदेश देना जानते हैं, लेकिन मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाते। जो मनुष्य सब कुछ जानकर भी अनजान बने रहते हैं, उन्हें इस बेजुबान बंदर से सीख लेनी चाहिए। आज के दौर में जहाँ मनुष्य केवल बड़ी-बड़ी बातें और उपदेश देना जानता है, वहीं इस बंदर ने ‘कर्म’ के जरिए असली धर्म का पालन कर दिखाया है।


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