
लोयाबाद। पूर्व प्रदेश प्रवक्ता सह बाघमारा विधायक प्रतिनिधि लोयाबाद मंडल के बिरेंद्र पासवान ने कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी को ई समाधान के माध्यम से धनबाद उपायुक्त के द्वारा एवं झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो, पुलिस महानिदेशक झारखण्ड, उपायुक्त धनबाद, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धनबाद, पुलिस उप महानिरीक्षक कोयला क्षेत्र बोकारो एवं अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, BCCL कोयला भवन, धनबाद को सोशल मीडिया X एवं पत्र के माध्यम से अवगत कराते हुए लिखा है कि खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड में कोयला, अभ्रक, लकड़ी और पत्थर जैसे खनिज संसाधन कई जिलों के लोगों के लिए रोजगार का प्रमुख जरिया है। लेकिन खनन कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी आए दिन हादसों को जन्म दे रही है।

कोयलांचल में हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर दुर्घटना के बाद मजदूरों के परिवार को मुआवजा थमा कर बीसीसीएल और आउटसोर्सिंग कंपनियां खुद को बेदाग साबित करने में जुट जाती हैं।उन्होंने कहा कि दिनांक 05 सितंबर 2025 को धनबाद बीसीसीएल एरिया-4 बाघमारा पुलिस अनुमंडल के रामकनाली ओपी क्षेत्र अंतर्गत बुटु बाबू बंगला के समीप कुम्हार टोला मुंडा धोड़ा में अचानक एक गंभीर भू धंसान और भूस्खलन की घटना हुई है। इस घटना में कई घर प्रभावित हुए हैं। कुछ घर जमींदोज भी हो गए हैं। वहीं कई लोगों के गंभीर रूप से जख्मी होने की भी खबर है। बताया जा रहा है कि मुंडा धौड़ा खटाल के पीछे भारी पैमाने पर अवैध कोयला खनन किया जा रहा था।

अवैध कोयले का कारोबार लगभग 3 वर्षों से लगातार किया जा रहा है,अवैध खनन को लेकर ग्रामीणों ने बीसीसीएल प्रबंधन को घटना का जिम्मेदार बताया।और मौके पर हजारों बोरी अवैध कोयला देखा गया। वहीं दूसरी ओर दिनांक 05 सितंबर 2025 को ही बीसीसीएल एरिया-4 में संचालित मां अंबे आउटसोर्सिंग कंपनी के प्रोजेक्ट क्षेत्र में भी बड़ा हादसा हो गया। परियोजना में भूस्खलन से भारी पत्थर गिरने से कंपनी का सर्विस वैन प्रोजेक्ट के अंदर पानी में चला गया। हादसे में कई मजदूरों की मृत्यु हुई है। यह हादसा बीसीसीएल और सीआईएसएफ अधिकारियों की घोर लापरवाही का परिणाम है। श्री पासवान ने मांग करते हुए लिखा है कि 1 – बीसीसीएल क्षेत्र में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार सवालों के घेरे में है।
क्षेत्र में मां अंबे आउटसोर्सिंग और डेको आउटसोर्सिंग कंपनियां खनन कार्य कर रही हैं। इन पर निगरानी और सेफ्टी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सेफ्टी ऑफिसर पर है, लेकिन बार-बार हो रहे हादसों ने उनकी भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 2 – डीजीएमएस (खान सुरक्षा महानिदेशालय) के निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बावजूद इसके समय-समय पर निरीक्षण करने वाले अधिकारी भी सुधार कराने में विफल हैं। हादसे के बाद केवल खानापूर्ति न हो, बल्कि दोषी अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और उसके ऊपर FIR दर्ज की जाए। एवं उन्होंने ध्यान आकर्षित कराते हुए लिखा कि जानकारी के अनुसार, डीजीएमएस के नियमों के तहत कंपनियों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।
इसके लिए प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये खर्च कर बीसीसीएल द्वारा सुरक्षा पखवाड़ा और सेमिनार भी आयोजित किए जाते हैं। बावजूद इसके, खदानों और परियोजनाओं में लापरवाही और अनियमितताओं का सिलसिला थम नहीं रहा है।
अवैध कोयला खनन और लापरवाह सुरक्षा इंतज़ामों के कारण धनबाद बार-बार ऐसे हादसों का गवाह बन रहा है। आखिर कब तक अवैध खदानों से मौत की चीखें उठती रहेंगी। जियो और जीने दो की भावना से ही क्षेत्र का विकास और अमन कायम रह सकता है।
मजदूरों की जान की कीमत सिर्फ मुआवजा नहीं, दोषी अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होनी चाहिए। प्रकाशित खबरों की छाया प्रति को संलग्न किया है साथ ही उन्होंने मांग करते हुए लिखा कि मामले को गंभीरता पूर्वक लेते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की कृपा करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाई जा सके।
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