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सरायकेला: बाना गाँव के शिव मंदिर में श्रद्धा से हुई चड़क पूजा, ॐ नमः शिवाय से गूँजा गाँव

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Apr 13, 2026
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सरायकेला: नीमडीह प्रखंड के लुपुंगडीह पंचायत स्थित बाना गाँव में चैत्र संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक चड़क पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई। जमींदार परिवार के स्व० महेंद्र सिंह द्वारा स्थापित प्राचीन शिव मंदिर में हर वर्ष की तरह इस बार भी पूजा का आयोजन किया गया।

सोमवार को बाना और पितकी गाँव के प्रत्येक घर में महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की। शिव मंदिर के पुजारी पंडित संतोष पांडे व पाठ भोक्ता मंडली ने घर-घर जाकर विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ चड़क पूजा का भोक्ता पाठ कराया। यह परंपरा जमींदार महेंद्र सिंह के समय से चली आ रही है।

हर साल चैत्र संक्रांति पर सार्वजनिक शिव मंदिर, बाना में चड़क पूजा का आयोजन होता है। इस दौरान बाना व पितकी गाँव के श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं। पूरे गाँव में ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयकारों से भक्तिमय माहौल रहा।

चड़क पूजा चैत्र पर्व की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है। इस अवसर पर पंचायत के विभिन्न गाँवों में भी धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।

सनातन परंपरा के पावन चैत्र पर्व ,इस दौरान रात्रि जागरण में छऊ नृत्य और दूसरे दिन सुबह मंदिर प्रांगण में होने वाले ‘भक्ता फुड़ा’ अनुष्ठान को लेकर खास उत्साह है।

मान्यता के अनुसार, चैत्र पर्व की रात जागरण कर छऊ नृत्य का आयोजन होता है। इसमें कलाकार पौराणिक कथाओं को जीवंत करते हैं। अगले दिन सुबह मंदिर प्रांगण में ‘भक्ता फुड़ा’ अनुष्ठान होता है। इसमें भक्त मन्नत पूरी होने पर पीठ में अंकुश चुभाकर छेद करते हैं और लगभग 100 फीट ऊँचे चड़क खंभे पर बाँधकर घुमाए जाते हैं।

ये दिव्य अनुष्ठान मिलकर क्षेत्र की अद्वितीय सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह हमारी समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है।


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