
दक्षिण पश्चिम दिल्ली जिले की डाबड़ी पुलिस ने द्वारका में एक वेश्यावृत्ति के अड्डे पर छापे की कार्रवाई में 11 युवतियों को मुक्त कराया जिनमें पांच नाबालिग बच्चियां थीं। पुलिस ने यह कार्रवाई एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन से मिली पुख्ता जानकारियों के बाद की जिसके सदस्यों ने फर्जी ग्राहक बन इस इस गिरोह के बारे में जानकारी जुटाई। इन लड़कियों को बेहतर अवसरों और नौकरी का झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर प्रदेश से लाया गया था। पुलिस ने छापे में आठ ग्राहकों और मौके से दो अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जिनके इस अड्डे का संचालक होने का शक है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की ट्रैफिकिंग की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है।

छापेमारी के दौरान पुलिस स्तब्ध रह गई जब एक लड़की बदहवास हालत में आलमारी में बंद मिली। मौके से कंडोम के पैकेट और सात कुत्ते भी मिले। एफआईआर के अनुसार, “इन सभी को बंधुआ हालत में कैद करके रखा गया था और उन्हें कहीं भी मर्जी से जाने की इजाजत नहीं थी।”

वेश्यावृत्ति का यह अड्डा जिस घर से चल रहा था, वह चारों तरफ से बंद था और कुत्तों को शायद इसलिए रखा गया था कि कोई यहां से भाग नहीं पाए। छापेमारी के दौरान आलमारी से मिली लड़की बदहवास हालत में थी और डर के मारे कांप रही थी। काउंसलिंग के दौरान लड़कियों ने बताया कि उन्हें डरा धमका कर व लगातार कड़ी निगरानी में रखा जाता था और किसी को भी घर से बाहर कदम रखने की इजाजत नहीं थी।
राजधानी में देह व्यापार में लिप्त गिरोहों में ट्रैफिकिंग के जरिए लाए गए बच्चों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, “यह प्रकरण मौजूदा हालात की गंभीरता की ओर इशारा करता है। बच्चों को पड़ोसी राज्यों से बहला फुसला कर ट्रैफिकिंग के जरिए लाया जाता है और उन्हें अमानवीय स्थितियों में धकेल दिया जाता है। कानून लागू करने वाली एजेंसियां तत्परता से अपना काम कर रही हैं लेकिन हमें यह यह ध्यान रखने की जरूरत है कि ट्रैफिकिंग एक संगठित अपराध है जिसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। ऐसे में हमारी रणनीति सुव्यवस्थित और बहुआयामी हो और छानबीन एक तय समयसीमा में होनी चाहिए। जब तक सभी आरोपियों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता, तब तक ट्रैफिकिंग और शोषण के ये गिरोह इसी तरह बेखौफ चलते रहेंगे।” एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (एवीए) देश में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के 250 से भी ज्यादा सहयोगी संगठन ट्रैफिकिंग व शोषण के अन्य स्वरूपों से बच्चों की सुरक्षा के लिए देश के 450 से भी ज्यादा जिलों में काम कर रहे हैं।
एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन ने पुलिस से सूचना साझा करने से पहले गहन छानबीन की ताकि जुटाए गए सबूत ठोस व प्रमाणिक हों। पर्याप्त जानकारी जुटाने के बाद इसके सदस्यों ने फर्जी ग्राहक बन कर इस अड्डे के संचालकों से बात की। इन संचालकों ने उन्हें कुछ लड़कियों के फोटो भेज कर पसंद की लड़की चुनने को कहा जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यहां ट्रैफिकिंग और वेश्यावृत्ति का अड्डा चल रहा है। टीम ने तुरंत इसकी सूचना दक्षिण पश्चिम दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर को दी। इसके बाद महिलाओं व बच्चों के लिए पुलिस की विशेष यूनिट ने छापे की कार्रवाई कर इन सभी लड़कियों को मुक्त कराया।
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