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वन विभाग की कार्रवाई से आदिम जनजाति परिवारों में दहशत: एक गंभीर मुद्दा

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Byadmin

Jun 26, 2025

 

सरायकेला : पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम प्रखण्ड अंतर्गत बोटा पंचायत के गांव बोटा टोला बांदरजलकोचा में कुल 16 परिवारों में 46 लोग वर्षों से बसबास करते आ रहे हे ओर सरकार द्वारा वर्ष 2021 से 2024 तक सभी परिवारों को बनपट्टा निर्गत किया गया हे । इसके बावजूद भी वन विभाग द्वारा बार बार मकान तोड़ने का और नोटिक देकर डराया जा रहा हे, यहां के सभी परिवारों को झारखंड सरकार द्वारा PM आवास और बिरसा आवाज बिजली पानी के साथ साथ राशन, आधार कार्ड, लेबर जव कार्ड भी दिया गया है । उसके बाबजूद आज यहां के आदिम जनजाति परिवारों को वन विभाग द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा हे,,

एक तरफ सरकार आदिम जनजातियों पहाड़िया, खड़िया, बिरहोड़ परिवार के लोग विलुप्त को देखते हुए अस्तित्व को बचाने के लिए केंद्र सरकार ओर राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपया खर्च करती हे ओर वही दूसरी ओर वन विभाग द्वारा इसका अस्तित्व को मिटाने के लिए काम कर रही हे। इन परिवार के जीवन जंगल पर निर्भर है। कभी ईको सेंसिटिव जॉन के नाम पर तो कभी ईको ट्यूरिज्म के नाम पर डरा रहा हे और उजाड़ने की काम कर रहे है। दूसरी ओर एन एच 33 राज्य मार्ग रामगढ़ से फंदोंलोगोड़ा तक दालमा सेंचुरी तराई विभिन्न जगह पर प्लांट लगाया गया । पहले इस क्षेत्र में हाथी की झुंड का विचरण जगह था ।आज हाथी की बहुल क्षेत्र में प्लांट लगाने से हाथी की विचरण करने की जगह सिमटते जा रहा ये कहा का न्याय हे ।
समाजसेवी
डॉ. सत्य नारायण मुर्मू ने कहा कि वन विभाग संविधान को नहीं मानती है वही जुगसलाई विधानसभा के विधायक श्री मंगल कालिंदी द्वारा विधानमंडल में यहां के विलुप्त आदिम जनजाति परिवार के लिए मूलभूत सुविधा के बारे में विधानसभा में बातों को रखा था तत्पश्चात वन विभाग नोटिक पर नोटिस थमाया जा रहा हे। उनके आदेश पर ही पीड़ित परिवारों से ब्लॉक प्रशासन द्वारा रूबरू होकर पीएम आवास, बिरसा आवास बिजली पानी का आवंटन किया गया। एक तरह सरकार इन जनजातियों को बचाने का काम कर रही हे ओर दूसरी ओर वन विभाग इन्हीं जातियों के अस्तित्व को मिटाने का प्रयास कर रही हे ये कैसे विचार धारा हे …?

में सरकार के साथ साथ सभी राजनीतिक पार्टियों और सभी सामाजिक संगठनों से आग्र करता हु कि उक्त विषयों पर संज्ञान ले।


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