
लोयाबाद (रिपोर्टर: अमित चौहान): लोयाबाद क्षेत्र के एकड़ा गांव में नदी का पुराना मिट्टी बांध मॉनसून की तेज बारिश के कारण ढह जाने से आसपास के करीब 1500 लोग गंभीर जलसंकट से जूझ रहे हैं। बांध टूटने के बाद करीब 20 दिनों तक पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप रही।

ग्रामीणों की पहल और दहशत

लंबे समय तक प्रशासनिक मदद न मिलने पर, ग्रामीणों ने स्वयं पहल की। नैनझरी देवी, नंद किशोर सिंह, राजबली सिंह, कृंता देवी, माया देवी और संतोष चौधरी जैसे ग्रामीणों ने मिलकर पत्थर और डाल-पत्तों से किसी तरह नदी में एक अस्थायी बांध तैयार किया, जिससे पानी की आपूर्ति फिर से चालू हो सकी है। हालांकि, यह कामचलाऊ व्यवस्था लंबे समय तक चलने की कोई गारंटी नहीं है।
ग्रामीण संतोष चौधरी ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, “अब तो सब बाल-बच्चा लेकर नदी जाते हैं नहाने-धोने। नदी में तेज बहाव है, डर बना रहता है कि कहीं हादसा न हो जाए।”
प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों ने बताया कि पहले बासदेवपुर कोलियरी प्रबंधन द्वारा पीट वाटर की आपूर्ति होती थी, लेकिन खदान बंद होने के बाद प्रबंधन ने नदी में बांध बनाकर पानी सप्लाई शुरू किया था। अब बांध टूटने के बाद पानी की भारी किल्लत हो गई है और प्रबंधन पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि ठंड में तो किसी तरह काम चल जाएगा, लेकिन अगर गर्मी तक नया बांध नहीं बना तो हालात बेहद खराब हो जाएंगे।
प्रबंधन का पक्ष
इधर, प्रबंधन ने सफाई देते हुए कहा है कि बांध के पुनर्निर्माण के लिए स्टीमेट तैयार कर लिया गया है, लेकिन फिलहाल फंड की कमी के कारण काम रुका हुआ है।
बताया जाता है कि नदी किनारे सैकड़ों आबादी निवास करती है, जिनकी पूरी जीवन रेखा इसी नदी के पानी पर निर्भर है। वहीं, बासदेवपुर 8 नंबर छोर पर तेज बहाव के कारण नदी का दायरा बढ़ गया है और किनारों की मिट्टी कट गई है।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
