
चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर “बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज” विषय पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने अपनी भाषायी विरासत को बचाने का सामूहिक संकल्प लिया।

मुख्य वक्ताओं के विचार:

डॉ. संजय कुमार यादव (DSW): उन्होंने मातृभाषा को व्यक्ति की पहचान बताते हुए कहा कि बहुभाषी शिक्षा आत्मविश्वास को सुदृढ़ करती है।
डॉ. संजय कुमार सिंह (वित्त पदाधिकारी): उन्होंने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे बौद्धिक विकास के लिए आवश्यक बताया।
विद्वानों का मत: श्री दिलावर पुरती ने “मातृभाषा बचेगी तो हम बचेंगे” का नारा दिया, वहीं डॉ. पाण्डव महतो और डॉ. आम्पा कुमार हेंम्ब्रम ने कुड़मालि, संथाली, हो और मुंडारी जैसी भाषाओं के रचनात्मक विकास पर जोर दिया।
सांस्कृतिक संगम:
कार्यक्रम में ओड़िया, बांग्ला, संस्कृत, अंग्रेजी, हिंदी सहित विभिन्न जनजातीय भाषाओं के विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। आयोजन सचिव डॉ. तपन कुमार खाँड़ा ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संचालन डॉ. सुभाष चंद्र महतो ने किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागाध्यक्ष और सहायक प्राध्यापक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. बसन्त चाकी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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