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निरसा में NH-19 पर अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी, DC और SSP ने किया निरीक्षण

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Jul 28, 2025

 

निरसा (धनबाद): आज सोमवार को धनबाद के उपायुक्त (DC) आदित्य रंजन, वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रभात कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) सुधीर कुमार चौधरी, अंचलाधिकारी (CO) रमेश रविदास और निरसा प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) इंद्रलाल ओहदार ने निरसा का दौरा किया। अधिकारियों ने NH-19 पर सड़क के किनारे से हटाए गए अतिक्रमण की स्थिति का जायजा लिया और यह देखा कि कितना हिस्सा साफ हुआ है और कितना अभी बाकी है।

 

उपायुक्त आदित्य रंजन और एसएसपी प्रभात कुमार ने हटिया मोड़ पर खड़े होकर पूरे निरसा बाजार का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद, उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जो अतिक्रमण हटा दिया गया है, उस पर दोबारा किसी को भी बैठने नहीं दिया जाएगा।

 

गरीब दुकानदारों में नाराजगी, नेताओं पर वादाखिलाफी का आरोप

हालांकि, इस दौरान उपायुक्त ने यह स्पष्ट नहीं किया कि NH-19 को कितने फुट जमीन की आवश्यकता है। स्थानीय दुकानदारों और जीटी रोड के निवासियों का कहना है कि यदि यह जानकारी सार्वजनिक कर दी जाती तो वे अपने हिसाब से NH को अपनी जमीन छोड़ देते, जिससे उन्हें इतना नुकसान नहीं उठाना पड़ता। गरीब दुकानदारों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे किसी तरह अपना पेट पालते हैं, लेकिन न तो झारखंड सरकार और न ही स्थानीय प्रशासन उनकी परवाह कर रहा है।

 

दुकानदारों ने यह भी आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाओ अभियान में केवल गरीबों पर ही बुलडोजर चलता है, अमीरों पर नहीं। निरसा बाजार से लेकर सिनेमा हॉल मोड़ तक, दोनों तरफ अभी भी कुछ अतिक्रमण बाकी है, खासकर उन पक्के भवनों का जो सड़क पर अतिक्रमण कर बने हैं, जबकि छोटी-मोटी झुग्गी-झोपड़ी को तुरंत हटा दिया गया है।

 

सरकारी जमीन चिह्नित कर पुनर्वास की मांग

फुटपाथ दुकानदारों ने सरकार से उनके रोजी-रोटी के लिए कुछ सोचने की अपील की है। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेता वोट लेने आते हैं और आश्वासन देते हैं कि “पहले वोट दो, फिर दुकान का चाभी लो।” दुकानदार विश्वास में आकर वोट तो दे देते हैं, लेकिन बाद में उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है।

 

दुकानदारों ने उपायुक्त, अंचलाधिकारी और बीडीओ से अपील की है कि निरसा क्षेत्र में काफी सरकारी जमीन उपलब्ध है। स्थानीय पदाधिकारियों को चाहिए था कि वे जमीन चिह्नित कर फुटपाथ दुकानदारों को अभी तक दुकानें बनाकर दे देते, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इससे गरीब दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

 

संवाददाता: नरेश विश्वकर्मा

 


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