
सरायकेला: पर्यावरण संरक्षण और जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जब समाज एकजुट होता है, तो बड़े बदलाव की नींव पड़ती है। कुछ ऐसा ही उदाहरण सरायकेला के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में देखने को मिला, जहाँ चौका गाँव की महिलाओं ने अपनी जीवनरेखा ‘जुड़िया’ (नदी) को दूषित होने से बचाने के लिए मोर्चा खोल दिया।

गंदगी और प्रदूषण का बढ़ता खतरा

लंबे समय से सार्वजनिक स्थानों पर प्लास्टिक कचरा और दुर्गंधयुक्त अपशिष्ट फेंका जा रहा था। यह कचरा न केवल वातावरण को प्रदूषित कर रहा था, बल्कि पास से बहने वाली स्वच्छ जुड़िया के जल को भी जहरीला बना रहा था। उल्लेखनीय है कि निचले इलाकों में बसे दर्जनों गाँवों के ग्रामीण इसी जुड़िया के पानी से स्नान करते हैं और अपने मवेशियों की प्यास बुझाते हैं। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर अनदेखी के कारण स्थिति गंभीर हो गई थी।
नारी शक्ति का शंखनाद
जब प्रदूषण का स्तर असहनीय हो गया, तब चौका गाँव की महिला समिति की दर्जनों महिलाएँ संगठित होकर विरोध में उतर आईं। महिलाओं के बढ़ते आक्रोश और एकजुटता की सूचना मिलते ही चौका थाना प्रभारी सोनू कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने महिलाओं की जायज मांगों को सुना और उन्हें उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
कठोर कार्रवाई का आश्वासन
थाना प्रभारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अब से नदी, नालों या किसी भी सार्वजनिक स्थल पर कचरा फेंकने वालों पर पुलिस की सख्त निगरानी रहेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मौके पर मुखिया कुनाराम माँझी, समाजसेवी हिकीम चंद्र महतो, बाजार समिति अध्यक्ष बसंत कुमार प्रामाणिक सहित वार्ड सदस्य रेणुका महतो, शत्रुघ्न महतो और अनिल गुप्ता ने भी महिलाओं के इस अभियान का समर्थन किया। यह घटना संदेश देती है कि सामुदायिक जागरूकता ही पर्यावरण संरक्षण का सबसे सशक्त माध्यम है।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
