
संवाददाता अंतर्कथा केरेडारी बालमुकुंद दास

मैं, योगेन्द्र साव, पूर्व मंत्री, झारखंड, केरेडारी थाना क्षेत्र चट्टी बरियातू में चल रहे शांतिपूर्ण जन आंदोलन के संबंध में हालिया घटनाक्रम पर अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहता हूँ।

पगार कांटाघर के पास हुई मारपीट की घटना को लेकर यह भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है कि आंदोलनकारी इससे जुड़े हैं, जबकि सच्चाई इसके ठीक विपरीत है। जिस स्थान पर यह घटना घटी, वहां हमारी ओर से चल रहा आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और उसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी अपनी जायज मांगों के समर्थन में बैठी हुई थीं। मुझे जानकारी मिली है कि इस दौरान महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की की गई, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
यह उल्लेख करना आवश्यक है कि उक्त धरना-प्रदर्शन की पूरी जानकारी मैंने पूर्व में ही अनुमंडल पदाधिकारी सदर को लिखित रूप से दी थी तथा पत्र के माध्यम से विधि-व्यवस्था बनाए रखने और उचित सुरक्षा व्यवस्था की मांग भी की गई थी। इसके बावजूद धरना स्थल या आसपास किसी भी प्रकार की पुलिस तैनाती नहीं की गई। सुरक्षा व्यवस्था में यह चूक कई गंभीर सवाल खड़े करती है, जिनकी निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
आंदोलन को लेकर पहले से ही आशंका जताई जा रही थी कि इसे कमजोर करने या बदनाम करने के लिए किसी अप्रिय घटना को अंजाम दिया जा सकता है। इसी कारण करबला स्थित धरना स्थल तथा जोरदाग, झुमरी टाड़ां स्थित मेरे आवास परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे और उन्हें ऑनलाइन जोड़ा गया था। घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि मैं धरना स्थल पर आंदोलनकारियों के साथ मौजूद था और पगार काटाघर की घटना से पूरी तरह अनभिज्ञ था।
मारपीट से जुड़े वायरल वीडियो में भी यह देखा गया है कि घटना को अंजाम देने वाले लोग एक जैसे कंबल ओढ़े हुए थे, जिससे यह आशंका और प्रबल होती है कि यह एक सुनियोजित प्रयास था। इस घटना में घायल हुए हाइवा चालक के शीघ्र स्वस्थ होने की मैं कामना करता हूँ और स्पष्ट करना चाहता हूँ कि हमारा आंदोलन किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करता।
मैं जिला प्रशासन से मांग करता हूँ कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, सभी उपलब्ध वीडियो और सीसीटीवी फुटेज को जांच का हिस्सा बनाया जाए, सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जिम्मेदारी तय की जाए तथा शांतिपूर्ण जन आंदोलन को बदनाम करने की किसी भी कोशिश पर रोक लगाई जाए तथा धरनास्थल के आसपास पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाए ताकि भविष्य में धरनास्थल पर उपस्थित ग्रामीणों के जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके ।
हमारा संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और जनहित से जुड़ा हुआ है, और हम संविधान के दायरे में रहकर अपनी मांगें उठाते रहेंगे।
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