
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला के चाईबासा में उद्योग विभाग अंतर्गत हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय तथा रेशम कार्यालय के तत्वावधान में तसर रेशम पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री चंदन कुमार, जिला परिषद अध्यक्षा सुश्री लक्ष्मी सुरेन, उप विकास आयुक्त श्री उत्कर्ष कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यशाला में सेंट्रल सिल्क बोर्ड के वैज्ञानिक, कच्चा माल बैंक चाईबासा के तकनीकी पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा लगभग 400 तसर रेशम कृषकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर तसर कोकून उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किटपालकों को प्रशस्ति पत्र, उपस्कर एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही उन्हें रेशम उत्पादन में निरंतर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्री चंदन कुमार ने रेशम कृषकों के साथ कोकून उत्पादन के साथ-साथ मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले वित्तीय वर्ष में जिले में धागाकरण, बुनाई, रंगाई एवं छपाई जैसे कार्यों को शुरू करने के लिए आवश्यक पहल की जाएगी।

उपायुक्त ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य विषय “कोल्हान का अनमोल वरदान-तसर कोकून से है हमारी पहचान” है, और जिला प्रशासन तसर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वहीं जिला परिषद अध्यक्षा ने भी किसानों को अधिक से अधिक तसर खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में तकनीकी एवं शोध पदाधिकारियों द्वारा किसानों को नई-नई तकनीकी जानकारियां भी प्रदान की गईं, जिससे उत्पादन में वृद्धि संभव हो सके।
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