
सरायकेला : चांडिल सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना से हुए।विस्थापित परिवारों के लोगो आज दो जून रोटी के दूसरे राज्य में पलायन करने लगा ।अबतक विस्थापित पुस्तिका नहीं बना न पुनर्वास स्थल में विस्थापितो लोगो बसाने की कार्य नहीं किया । आज भी

लोग डैम जलाशय के किनारे तिरपाल एंब झोपड़ी बनाकर रहने लगा क्योंकि गांव भी डूब

चुके हे, परन्तु लोगो आपने जीविका किसी प्रकार काट रहे हे इस उम्मीद में कि मेरा विस्थापित कार्ड बनेगा ओर हमे राहत मिलेगा । विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने चांडिल डैम से प्रभावित 116 गांवों के विस्थापितों के लगातार नुकसान पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 43 वर्ष बाद भी विस्थापितों को डूब-तबाही झेलनी पड़ रही। बरसात के समय विस्थापित का आवाज नहीं सुनाई नहीं देता ।उस दौरान पानी घर ओर गांव को डुबाने लगता था । न मंत्री नेता न पत्रकार की आवाज पहुंचता हे। आज दुर्भाग्य हे कि एक फोन पर 24 मार्च 2026 को बिना बारिश और लगभग 179.70 RL जलस्तर पर दो फाटक 40 सेमी खोलने पर महतो ने सवाल उठाए—विभाग ने बताया कि जमशेदपुर के पत्रकारों के फोन के बाद फाटक खोले गए। महतो ने कहा कि विस्थापितों की पीड़ा पर कोई सुनवाई नहीं होती, जबकि दबाव में फाटक खोलना दोहरी नीति है, जो बर्दाश्त नहीं।
चांडिल डैम फाटक खोलने में भेदभाव पर भड़के राकेश रंजन महतो ने इसे दोहरी नीति बताया विस्थापितों की पीड़ा पर ध्यान नहीं, जबकि बाहरी दबाव पर तुरंत कार्रवाई। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और बर्दाश्त से बाहर कहा।
राकेश रंजन महतो ने यह भी कहा कि यदि आस्था के पर्व छठ के नाम पर फाटक खोला जा सकता है, तो टुसू पर्व और छाता पोखर मेला के लिए जलस्तर कम करने के लिए दिए गए आवेदन और मांगों को नजरअंदाज करना स्पष्ट रूप से दोहरी नीति को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि 116 गांवों के विस्थापित एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ें। यदि विभाग और सरकार विस्थापितों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो आने वाले समय में विस्थापितों को बड़े जन आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विस्थापितों के साथ यही दोहरी नीति और अन्याय जारी रहा, तो आंदोलन तेज किया जाएगा और विस्थापित यह फैसला लेने को मजबूर होंगे कि चांडिल डैम का फाटक हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए, ताकि डैम से एक बूंद पानी भी नीचे नहीं जाने दिया जाए।
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