
केरेडारी (हजारीबाग): केरेडारी प्रखंड स्थित चट्टीबरियातु कोल माइंस में विस्थापन का दंश झेल रहे परिवारों का धैर्य अब जवाब दे गया है। बिरसा विस्थापन यूनियन के बैनर तले बड़ी संख्या में महिलाओं ने खदान क्षेत्र में उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और खनन कार्यों को पूरी तरह बंद करा दिया। आंदोलनकारियों की स्पष्ट मांग है कि भूमि अधिग्रहण के लिए 2013 के कानून के तहत उचित मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।

31 दिसंबर से जारी है अनिश्चितकालीन आंदोलन

यह आंदोलन पिछले एक महीने से अधिक समय (31 दिसंबर) से लगातार जारी है। पूर्व कृषि मंत्री की अगुवाई में चल रहे इस आंदोलन में अब महिलाओं ने फ्रंटलाइन पर आकर कमान संभाल ली है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन और प्रशासन विस्थापितों के अधिकारों की अनदेखी कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें:
2013 का कानून: भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम-2013 के प्रावधानों को अक्षरशः लागू किया जाए।
उचित मुआवजा: वर्तमान बाजार दर और कानून के अनुरूप विस्थापितों को मुआवजा मिले।
पुनर्वास की व्यवस्था: केवल जमीन लेना पर्याप्त नहीं, विस्थापित परिवारों के रहने और रोजगार की ठोस व्यवस्था की जाए।
करोड़ों का नुकसान, प्रबंधन मौन
खदान में काम ठप होने से कंपनी को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। भारी मशीनों के पहिए थम गए हैं और उत्पादन शून्य पर पहुँच गया है। महिलाओं ने खदान परिसर में जमकर नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, एक इंच भी काम आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
प्रशासनिक हलचल तेज
हालांकि मौके पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और प्रशासनिक अमला स्थिति पर नजर रखे हुए है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कंपनी प्रबंधन या स्थानीय प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए कोई ठोस पहल या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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