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कुल्टी बराकर – बराकर में राजस्थानी लोकगीत के माध्यम से होली के गीत का आंनद लिया गया

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Feb 25, 2026

 

 

रिपोर्ट सत्येन्द्र यादव

कुल्टी बराकर शहर में होली का रंग चढ़ने लगा हैं। बिति रात बराकर चौकबाजार स्थित मित्र मडंल के लोग ढप की थाप पर राजस्थानी लोकगीत के माध्यम से होली के गीत का आंनद लिया गया।

चौकबाजार परिसर में मित्र मडंल के लोग राजस्थान में होली (फागण) के प्रमुख लोकगीतों में “रंग गुलाली”, “फागण आयो”, “छांग ढीरो रे”, “होली आई रे” और “बगन की मोरनी” शामिल हैं। इन गीतों में ‘चंग’ और ‘ढप’ की थाप पर फागुन का उल्लास, राधा-कृष्ण की होली और रंग-बिरंगे परिदृश्य का वर्णन किया गया। चौकबाजार में यह परंपरा पिछले एक सौ साल चल रही हैं।

राजस्थानी लोकगीत गाते हुए युवकों की टोली होलिका दहन के एक दिन पूर्व बराकर आदर्श विद्यालय के पास होलिका को विधि-विधान के द्वारा मंत्रोचारण कर होलिका को स्थापित करते हैं और दूसरे दिन भक्त प्रह्लाद का अह्वान कर होलिका दहन करवाते हैं। पुरे कुल्टी विधानसभा में इस प्रकार का होलिका दहन बराकर में ही देखने को मिलता हैं। जब कि मारवाड़ी युवा मंच ने होली के लेकर कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया हैं। जहा ख्यातिप्राप्त कवि और कवियित्री का जमवाड़ा होगा।

इस अवसर पर बराकर मित्र मडंल के प्रशांत दुधानी, अजय राजगड़िया, अंकुर गोपालका, नवीन पोद्दार, कालू बंशल, कैलाश गोयल, अरूण शर्मा, मनोज चौधरी, गुल्लू सुल्तानिया, मनीष दुधानी, राज गग॔ समेत कई लोग उपस्थित थे।


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