
नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बाद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने लगे हैं। इसी कड़ी में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है।

इंडस्ट्रियल यानी औद्योगिक डीजल अब ₹22.03 प्रति लीटर महंगा हो गया है। पहले इसकी कीमत ₹87.57 (करीब ₹87.67) प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर ₹109.59 प्रति लीटर हो गई है। इसके साथ ही प्रीमियम पेट्रोल के दामों में भी बढ़ोतरी की गई है और नई दरें लागू कर दी गई हैं।

इंडस्ट्रियल डीजल का इस्तेमाल आम वाहनों में नहीं होता, बल्कि यह फैक्ट्रियों, बड़े शॉपिंग मॉल, डेटा सेंटर, जेनरेटर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम आने वाली भारी मशीनों—जैसे JCB और बुलडोज़र—में उपयोग किया जाता है। इस पर किसी प्रकार की सब्सिडी भी नहीं मिलती, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ता है।
अब सवाल है कि इसका असर आम आदमी पर कैसे पड़ेगा? दरअसल, जब फैक्ट्रियों और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ेगी, तो कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स और सेवाओं के दाम बढ़ा देंगी। इसका मतलब है कि रोजमर्रा की चीजों से लेकर कंस्ट्रक्शन और बिजली तक सब कुछ महंगा हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतों में यही तेजी बनी रही, तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। ऐसे में आम जनता को आने वाले दिनों में और आर्थिक दबाव झेलना पड़ सकता है।
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